भ्रष्टाचारी
बौखला रहे हैं सारे भ्रष्टाचारी,
नीदें उड़ाई सरकार ने हमारी,
बन गई है हमारी तो भाजी,
हम करेंगे केवल नारे बाज़ी ।
वर्षों से था केवल हमारा राज़,
हम करते नहीं थे कोई का़ज,
घोटालों में लिप्त गिराते गाज,
उस वक्त हमें था खुद पर नाज़ ।
एक हो गए हैं अब सारे देशद्रोही,
बने हैं देशभक्तों के ये नए विद्रोही,
दुष्ट पापी भ्रष्टाचारी ये बड़े निर्दयी,
कूटनीतिज्ञ करामाती ये राष्ट्रद्रोही ।
कैसे हटी ये धोखाधड़ी की माया,
समझ में हमारे अभी तक न आया,
जनता में भी जोश “आनंद” छाया,
बेहोश थी पहले नींदों से जगाया ।
नई सरकार कभी रुपया बदलती,
तो कभी ये पुराने ऐक्ट बदलती,
कभी नया बिल लाकर बरसती,
तूफानों सी एकधार ये हैं गर्जती ।
— मोनिका डागा “आनंद”
