बीर बाल बलिदान दिवस
नन्हे कदम चले
धर्म की राह पकड़कर
इतिहास ठहर गया
मासूम आँखों में
डर नहीं, बस विश्वास
दीपक-सा उजास
सिंहासन काँपा
जब शिशु ने सत्य कहा
मौन हुआ अत्याचार
केशों में शपथ
माँ की लोरी बन गई
अमर साहस
कटते हुए शीश
झुका नहीं स्वाभिमान
ऊँचा रहा धर्म
रक्त की बूँदें
माटी को समझा गईं
आज़ादी का अर्थ
युग-युग की साँसों में
गूँजता है बलिदान
शिशु का प्रणाम
आज भी भारत
उस नन्हे वीर से
रौशन है भीतर
— डॉ. अशोक
