वन्दन अभिनन्दन और अभिवादन
सुबह का सूरज उगा,
महान भाषणों की प्रतिध्वनि,
दिल श्रद्धा में झुके।
नर्म नदियाँ बहें,
देश के सपनों को लिए,
बुद्धि हमारे पथ दिखाए।
पंखुड़ियाँ धरती को छूएँ,
हर फूल एक श्रद्धांजलि,
मौन भी प्रेम बोले।
हवा मधुर गीत गाए,
पहाड़ साहस की गूँज बनें,
आशा के साथ आत्मा ऊँची उठे।
मंदिर की ज्योति शाम में जले,
छायाएँ सुनहरी रोशनी में नाचे,
स्मृतियाँ मधुर बने रहें।
पंछियों का गीत आकाश में बहे,
शांति और वीरता गुँथे हों,
राष्ट्र अनुग्रह से साँस ले।
तारों से सजी रात,
कोमल दीप से मार्गदर्शन,
विरासत चमकती रहे।
उनके शब्दों की गूँज,
हर दिल में, हर घर में,
भारत गर्व से मुस्कुराए।
— डॉ. अशोक
