हमें किस बात पर परेशानी है (कटाक्ष)
पड़ोसी मुल्क में इतना कुछ हो रहा है
बात- बात पर इतनी खींचा-तानी है
हम तो अपने घरों में सुरक्षित हैं
फिर हमें किस बात पर परेशानी है।।
वहां कुछ भी हो रहा है तो होने दो
हमें तो तुम बस मस्त सोने दो
हमारा व्यापार बस ठीक चलता रहे
वह रो रहे हैं, तो उन्हें रोने दो
हमने थोड़े न उनका ठेका लिया है
फिर हमें क्यों कर इतनी हैरानी है
हम तो अपने घरों में सुरक्षित हैं
फिर हमें किस बात पर परेशानी है।।
ठीक है हमारी सीमा उनसे लगती है
बी एस एफ है तो, पहरेदारी करती है
फिर हम किस बात की चिन्ता करें
तुम्हारी यही बात तो मुझे अखरती है
व्यर्थ का तनाव क्यों कर ओढ़ रखा है
जब आराम से चल रही जिंदगानी है
हम तो अपने घरों में सुरक्षित हैं
फिर हमें किस बात पर परेशानी है।।
चुनी हुई सरकार है, सब संभाल लेगी
कुछ विपदा आई तो हमें उबार लेगी
तुम बस गलतफहमी में जिये जाओ
तेरी जिन्दगी वह और भी संवार देगी
पहले कई बार धोखा खाये तो क्या
हमारी तो हमेशा की यही कहानी है
हम तो अपने घरों में सुरक्षित हैं
फिर हमें किस बात पर परेशानी है।।
जब सर पर आ पड़ेगी तब देख लेंगे
मोटे- मोटे आंसू आंखों में समेट लेंगे
समय रहते क्यों नही चेत पाए हम
तब छाती पीटेंगे और चादर लपेट लेंगे
अन्याय के समक्ष सदा झुकते जाना
बेबसी नही, कायरता की निशानी है
हम तो अपने घरों में सुरक्षित हैं
फिर हमें किस बात पर परेशानी है।।
आपस में ही गर हम जो बंटे रहेंगे
फिर किस तरह भला दुश्मन से लड़ेंगे
जाति-पाति का भेद-भाव भुला कर ही
आसन्न संकट का सामना कर सकेंगे
कोई माने या चाहे न माने
कल अपने ऊपर भी ये विपदा आनी है
जानबूझकर आंखें मूंदे रखना
कोई बुद्धिमानी नही यह तो नादानी है
हम तो अपने घरों में सुरक्षित हैं
फिर हमें किस बात पर परेशानी है।।
— नवल अग्रवाल
