नया साल हमें सिखाता है कि हर अंत नई शुरुआत है, जीवन एक यात्रा है, मंज़िल नहीं
नया साल आया और पुराना साल चला गया। कैलेंडर के पन्ने पलटे, लेकिन मन में एक सवाल कौंध उठा,जीवन का एक वर्ष फि़र कम हो गया। क्या यही ज़िंदगी है कि हम बस मृत्यु की ओर बढ़ते चले जा रहे हैं? यह विचार उदासीनता की छाया डाल सकता है, पर सकारात्मक सोच इसे एक नई रोशनी में बदल देती है। जीवन को मृत्यु की ओर यात्रा मानने के बजाय, इसे एक अनमोल उपहार की तरह देखें,हर पल नई संभावनाओं से भरा।प्रायः लोग अपने जीवन के पलों को नकारात्मक चश्मे से देखते हैं। कल की चिंता, भविष्य का डर, और गुज़रे लम्हों का पछतावा,ये सब मिलकर वर्तमान को फ़ीका कर देते हैं। लेकिन सकारात्मक सोच कहती है: “जीवन एक यात्रा है, मंजि़ल नहीं।” उम्र चाहे 20 की हो या 80 की, हर पल को जीना सीखें। आयुर्वेद की दृष्टि से भी, जीवन को ‘जीवन’ ही कहते हैं—जियो, बढ़ो, फलो। योग और नेचुरोपैथी हमें सिखाते हैं कि श्वास के साथ हर क्षण को स्वीकार करो।हर पल को वर्तमान में जियो, अतीत को सबक मानो, भविष्य का सपना देखो। आज के पल को पूर्णता से अनुभव करो। सुबह की पहली चाय, शाम की सैर, या प्रियजनों की हंसी,इन्हें संजो लो।कृतज्ञता का अभ्यास करो, रोज़ तीन चीजें लिखो जिनके लिए आभारी हो। यह छोटी आदत दिमाग़ को सकारात्मक तरंगों से भर देगी। जैसे, नया साल हमें याद दिलाता है कि हम अभी भी सांस ले रहे हैं,यह अपने आप में आशीर्वाद है।छोटे लक्ष्य बनाओ, उम्र कोई बाधा नहीं। 50 में भी नई कविता लिखो, योग सीखो, या परिवार के साथ घूम आओ। हर दिन एक नया ‘शेर’ रचो, जैसे उर्दू शायरी में जीवन को ‘बहार’ कहते हैं।सकारात्मक संगति चुनो,ऐसे लोग साथ रखो जो प्रेरित करें। भारतीय संस्कृति में ‘सत्संग’ की परंपरा यही सिखाती है,सकारात्मक ऊर्जा जीवन को जीवंत बनाती है।स्वास्थ्य पर ध्यान दीजिए,आयुर्वेद बताता है, संतुलित आहार, प्राणायाम और ध्यान से हर उम्र में ताज़गी बनी रहती है। मृत्यु को डरना छोड़ो, जीवन को गले लगाओ।जीवन की यह यात्रा सीधी रेखा नहीं, बल्कि घुमावदार राह है। नया साल हमें सिखाता है कि हर अंत नई शुरुआत है। सकारात्मक सोच अपनाओ तो एक वर्ष कम होना नहीं, बल्कि अनुभवों का खज़ाना बढ़ना लगेगा। हर पल को जीयो, जैसे कोई ग़ज़ल,हर मिसरा नया रंग भरे। उम्र बस अंक है, ज़िंदादिली असली मापदंड।तो आज से संकल्प लो,हर सांस को उत्सव बनाओ। नया साल मुबारक नहीं, हर दिन नया साल हो!
— डॉ.मुश्ताक़ अहमद शाह सहज़
