लघुकथा

संवेदना 

कुत्तिया के तीन बच्चे एक दूजे के साथ खेल रहे थे लेकिन वह उदास थी, ऐसा इसलिए कि उसके एक बच्चे को किसी मोटरसाइकिल सवार ने धक्का मार कर बिना परवाह किए आगे –निकल गया, सड़क पर खड़े लोग मूक दर्शक बने रहे, किसी ने कुछ नहीं कहा उसे, और,,,, और अगले दिन उसके बच्चे को ठंढ ने उठा लिया। कुत्तिया अब मटी की रखवाली कर रही थी, जो लोग शौक से कुत्ते पालते हैं उनकी आंखों का पानी पानी नहीं रह गया था। यह जानवर नहीं बल्कि एक मांँ की संवेदना थी। 

— विद्या शंकर विद्यार्थी 

विद्या शंकर विद्यार्थी

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