विश्व सत्य व शक्ति
विश्व सत्य की नहीं, शक्ति की सुनता है,
साधन सम्पन्न यूं दूसरों को कचोटता हैं।
बेवजह आरोप लगाना उनकी आदत है,
चाटुकारिता प्रत्येक देश करें ये चाहत है।
विश्व की स्थितियां देशों को मजबूर करें,
आइये ‘भारत’ से सीखने की इच्छा करें।
भविष्य के गर्भ में हैं कितना सीख पाएं,
करों ‘चिंतन मनन’ सामने जो दिख पाएं।
खोजों नया रास्ता हो परम वैभव सम्पन्न,
कठिन परिस्थितियाँ ना हो कभी उत्पन्न।
क्योंकि, विश्व ‘सत्य नहीं शक्ति’ हैं सुनता,
हमेशा हो शरीर में मन बुद्धि व सबलता।
(संदर्भ-मोहन भागवत-युवा संवाद कार्यक्रम)
— संजय एम तराणेकर
