सामाजिक

धर्मपत्नी

“सब कहते हैं कि बीवी केवल तकलीफ देती है, कभी किसी ने ये नहीं कहा कि तकलीफ में हमारा साथ भी सिर्फ वही देती है……!!”

आज रोजमर्रा की जिंदगी में हम अक्सर अपनी जीवन संगिनी, अपनी अर्धांगिनी, अपनी धर्मपत्नी के साथ हुई “नोक-झोंक” और उससे जो “शिकायतें” हैं, उनके कारण उसकी अहमियत को नजरअंदाज कर देते हैं जबकि हमारे घर को ‘घर’ बनाने वाली वो ही है। हमारी संस्कृति में विवाह को एक पवित्र बंधन माना जाता है किंतु आज आधुनिकता के नाम पर सोशल मीडिया के माध्यम से और हास्य व्यंग्य के नाम पर पत्नी की केवल ‘शिकायत करने वाली’ या ‘परेशान करने वाली’ या ‘नकारात्मक’ छवि बना दी गयी है। लेकिन सच्चाई इसके विपरीत है। जब हमारे जीवन में मुसीबतों का दौर शुरू होता है या कठिन समय आता है तो एक पत्नी ही होती है जो कंधे से कंधा मिलाकर साथ में खड़ी होती है।
हमारी पत्नी बनकर वो अपना घर, अपना नाम और अपनी पूरी पहचान छोड़ देती है। वो हमारे परिवार का ही हिस्सा नहीं बनती बल्कि हमारे घर की हर समस्या, हर जिम्मेदारी और हर दुख को अपना लेती है। वह हमारी पसंद को अपनी पसंद बना लेती है। हम पुरुष अक्सर अपनी भावनाएं व्यक्त नहीं कर पाते, ऐसे में हमारी पत्नी हमारे अनकहे शब्दों को समझकर हमारी भावनाओं को पूरा करती है। जब भी हम शादीशुदा पुरुषों पर कोई संकट आता है तो सबसे पहले हमारी पत्नी ही कहती है कि “घबराइए मत, मैं हूँ ना,” और इन शब्दों के कारण ही मुरझाए मन को सहारा मिल जाता है। हम अक्सर अपनी पत्नी के बार-बार फोन करने या टोकने से परेशान रहते हैं लेकिन गहराई से सोचें तो यह पत्नी के मन में आई असुरक्षा की भावना और हमारे प्रति उसके अगाध प्रेम का मिश्रण है। वह चाहती है कि हम सुरक्षित रहें, स्वस्थ रहें और सही रास्ते पर चलें। जिस दिन यह “टोकना” बंद हो गया उस दिन रिश्ते में एक खालीपन आ जाएगा जिसे कोई और नहीं भर सकेगा जिसका परिणाम हमारे परिवार का बिखराव होगा।
हमारी सारी कमियों, कमजोरियों को जानते हुए हमारी पत्नी दुनिया के सामने हमें सबसे बेहतरीन, समझदार तथा मजबूत इंसान साबित करती है। हम पुरुषों की सफलता के पीछे हमारी पत्नी का मौन सहयोग होता है। जब हमारा शरीर भी साथ छोड़ने लगता है तब हमारी पत्नी ही सहारा देती है। पति पत्नी का रिश्ता कांच की तरह नाजुक नहीं, बल्कि सोने की तरह कीमती होता है जिसे विश्वास और सम्मान की आग में तपाना पड़ता है। पत्नी का साथ वह सुकून है जिसे शायद शब्दों में बयां करना मुश्किल है, लेकिन दिल से महसूस करना बहुत आसान है।

दिल की कलम से….

— डॉ. विकास शर्मा

डॉ. विकास शर्मा

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