बाल कविता

एक कहानी बादल की

आओ बच्चों तुम्हें सुनाऊँ, एक कहानी बादल की,
काले- पीले, रंग- बिरंगे, भूरे- नीले बादल की।
रूई से बन गगन में घूमें, बादल धर कर रूप सलोने,
भरा हुआ है कुछ में पानी, बात निराली बादल की।
सोच रहे क्या कहाँ से लाते, इतना सारा ये पानी,
धरती जिससे धानी बनती, प्यास बुझाते बादल की।
जब वर्षा का मौसम आया, बादल ने जल बरसाया,
बहता पानी गया समंदर, आस बन गया बादल की।
सूरज की गर्मी से पानी, भाप बना औ’ गगन में पहुँचा,
घनी भाप से बादल बन गये, यही कहानी बादल की।
छोड़ समंदर का खारापन, मीठा पानी बादल ले जाता,
पर उपकार की खातिर बरसो, सीख यही है बादल की।

— डॉ. अ. कीर्तिवर्द्धन