ग़ज़ल
नील परी सी लगी मुझे, नील अंबर से परिधान में,दिल अटक कर रह गया तुम्हारी सौम्य मुस्कान में। माथे पर
Read Moreमेरा लगावदेगा घावकिसको दोष दूँ,थी खता मेरीथी रजा मेरीकिसको दोष दूँ, नहीं शिकायतयही रिवायतकिसको दोष दूँ,बड़ा नादान थामैं अनजान थाकिसको
Read More