मुक्तक
बाद मुद्दतों के दिल की खिड़की पर आहट हुई,जमाने की इस भीड़ में मुझे तेरी ही चाहत हुई।ना जाने कितने
Read Moreकुछ सतरंगी ख्वाब चुनकर लाया हूँ,दिल अपना तेरे लिए लेकर आया हूँ।कहीं तुम ठुकरा ना दो ये गुलाब मेरा,बस यूँ
Read Moreमाथे पर सजा लाल तिलक लगे ऐसा, जैसे उगते सूरज की लाली हो,चेहरे की यह खिली मुस्कान लगे ऐसी, जैसे
Read Moreमेरा लगावदेगा घावकिसको दोष दूँ,थी खता मेरीथी रजा मेरीकिसको दोष दूँ, नहीं शिकायतयही रिवायतकिसको दोष दूँ,बड़ा नादान थामैं अनजान थाकिसको
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