गीतिका/ग़ज़ल

ग़जल

आज खुशियाँ सभी ओर छाने लगीं।
ये बहारें अभी गीत गाने लगीं।।

लो भ्रमर आ गये मुस्कुराते हुये।
आज कलियाँ उन्हें ही लुभाने लगीं।।

प्यार की बात करनी हमें है अभी।
बोलियाँ ही मगर लड़खड़ाने लगीं।।

सोचते हम रहे चल चलें घूमने।
आँधियाँ आज तूफ़ान मचाने लगीं।।

सब अभी वसंती हो गयीं क्यारियाँ।
ये फुहारें अभी देख आने लगीं।

ज़िंदगी खुशनुमा हो गयी आज तो।
( ये हवायें मधुर गीत गाने लगीं। )

इक नशा ही अभी तो चढ़ा जा रहा।
आज ख़ामोशियाँ गुनगुनाने लगीं।।

— रवि रश्मि ‘अनुभूति’