मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम : काव्य में आदर्श जीवन

बिहार के सीवान जिले के चैनपुर गाँव के युवा साहित्यकार, कवि एवं लेखक, पाँच पुस्तकों के रचनाकार तथा पूर्व में चार पुस्तकों के सफल संपादक रूपेश कुमार द्वारा संपादित पुस्तक “मर्यादा पुरुषोत्तम : भगवान श्री राम” एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण, भावपूर्ण और विचारोत्तेजक साहित्यिक कृति है। इस पुस्तक में भगवान श्री राम के आदर्श जीवन, उनके गुणों, मर्यादाओं और पुरुषार्थ का विविध कवियों द्वारा अपनी-अपनी साहित्यिक रचनाओं के माध्यम से प्रभावशाली एवं सार्थक चित्रण किया गया है। इस संग्रह में कुलदीप सिंह रुहेला, सुमन झा ‘माहे’, गरिमा लखनवी, आकाश शर्मा ‘आज़ाद’, रेखा चौरसिया, पूनम जैन अग्रवाल ‘चाँदनी’, शाहाना परवीन ‘शान’, सुनील कुमार ‘सत्यार्थी’, संध्या चतुर्वेदी, वर्तिका अग्रवाल ‘वरदा’, दया भट्ट ‘दया’, डॉ. अनामिका वैश्य ‘आईना’, अतुल कुमार शर्मा, डॉ. सुनीता मिश्रा, मुन्नी कुमारी, डॉ. टीना राव, डॉ. सुमन शर्मा, देवेंद्र कुमार शर्मा, गीता रानी, नरेंद्र सिंह भरथला ‘कुंवर सा’, संजय ‘सरल’, श्रद्धा सिंह ‘विदुषी’, अनीता सिंघल, नीतू नागर ‘अंबर’, कवि प्रशांत सोऊ, भक्ति दीपक, रजत त्यागी, डॉ. कुमारी प्रियंका, योग्यता राज चौहान, महेंद्र कुमार मिठारवाल, आर्ची कुमारी, जगदीश प्रसाद गबेल, देवाशीष तिवारी, डॉ. शरद शर्मा, रुचिता माथुर, श्रीनिवास यन, डॉ. प्रशांत पंकज, डॉ. ऋचा बिश्वाल, उज्जवल कुमार श्रीवास्तव, सत्य सुरेन्द्र, श्रीमती पुष्पा गबेल, डॉ. सरला सिंह ‘स्निग्धा’, डॉ. कनक लता जैन, डॉ. नम्रता कुमारी, इन्दु कुमारी, जयति नारायण तिवारी, डॉ. सोनल मिश्रा एवं डॉ. नीलू शुक्ला ‘समीर’ जैसे प्रतिष्ठित कवि-कवयित्रियों की रचनाएँ सम्मिलित हैं। इन सभी साहित्यकारों ने अपने-अपने भावबोध, शैली और दृष्टिकोण से भगवान श्री राम के धर्म, कर्तव्य, त्याग, करुणा, सत्य, निष्ठा और आदर्श पुरुषार्थ का अत्यंत मार्मिक एवं प्रेरणादायक चित्रण किया है। यह कृति केवल एक काव्य-संग्रह भर नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों, परंपराओं और आदर्शों की सशक्त एवं जीवंत प्रस्तुति है।
संपूर्ण रूप से यह पुस्तक भगवान श्री राम के चरित्र को आधुनिक संदर्भों में प्रस्तुत करते हुए पाठकों को नैतिकता, मर्यादा और जीवन मूल्यों की ओर प्रेरित करती है। संपादक रूपेश कुमार का यह साहित्यिक प्रयास निश्चय ही प्रशंसनीय है, जिसने इतने विविध और सशक्त रचनाकारों को एक सूत्र में पिरोकर एक उत्कृष्ट और स्मरणीय साहित्यिक ग्रंथ का स्वरूप प्रदान किया है।
