चाचा चौधरी (हास्य व्यंग्य)
कभी इनको तो कभी उनको
अपने हिटलरशाही हुक्म सुनाते
और जो उनसे असहमति जताता
उन पर टैरिफ का डंडा चलाते।
अपनी उपलब्धियों का डंका पीटकर
खुद अपने मुंह मियां मिट्ठू बन जाते
उपर से नियति का मजाक तो देखिये
सबसे पुराने वो लोकतंत्र कहलाते ।।
मध्यस्थता के कार्य में महा निपुण वह
शांति समझौता करवाते फिरते
कोई उन्हें तरजीह दे या न दे
विश्व भर में चाचा चौधरी कहलाते।
नोबेल शांति पुरस्कार की चाह में
सगरे जगत में अस्थिरता फैलाते
ऊपर से नियति का मजाक तो देखिये
सबसे पुराने वो लोकतंत्र कहलाते।।
इतनी ज़मीन/सम्पदा होने के बावजूद
हैं दूसरों के हक पर निगाहें गड़ाए
खुद को श्रेष्ठ सिद्ध करने की होड़ करें
देश चाहे धरातल में जाए तो जाए।
बलिहारी जाऊं उनकी फितरत पर
गिरगिट की माफिक रंग बदलते जाते
उपर से नियति का मजाक तो देखिये
सबसे पुराने वो लोकतंत्र कहलाते।।
कभी जोकरों की भांति नृत्य कर के
खुद पद की गरिमा करते तहस -नहस
अपनी छवि सुधारने के चक्कर में
कई बार दिखते स्वयं वह बेबस।
पूर्ववर्ती को हर समय गाली देकर
अपनी पीठ स्वयं वह थपथपाते जाते
ऊपर से नियति का मजाक तो देखिये
सबसे पुराने वो लोकतंत्र कहलाते ।।
वैश्वीकरण के इस बदलते दौर में
सबकी ही है एक दूसरे पर निर्भरता
बहुत दिनों तक कोई भी राष्ट्र
अपनी नीति हम पर नही थोप सकता।
सब-कुछ भली भांति जानते हुए भी
बचकानी हरकतों से वो बाज न आते
उपर से नियति का मजाक तो देखिये
सबसे पुराने वो लोकतंत्र कहलाते।।
भारत को अस्थिर करने की कोशिशें
पिछले कुछ समय से लगातार जारी हैं
टैरिफ की मार जैसे काफी नही थी
और कड़े कदम उठाने की तैयारी है।
विश्व के इस सबसे बड़े लोकतंत्र की
ताकत मापने में वह भूल कर जाते
ऊपर से नियति का मजाक तो देखिये
सबसे पुराने वो लोकतंत्र कहलाते।।
— नवल अग्रवाल
