मुक्तक/दोहा

मुक्तक

रखना हो रिश्तों को कायम, किसी लम्बे काल तक,
जेब खुली, मुँह बन्द, समझौता करो हर हाल तक।
क्या हुआ, किसने किया, निर्लिप्त रह कर देखिये,
अगर बगावती तेवर दिखाये, नोच डालेंगे खाल तक।

रिश्तों का एक ही रिश्ता, रिश्तों से देखा यहाँ,
अर्थ सबसे प्रमुख रहता, रिश्तों के रिश्ते यहाँ।
रिश्ता निभाने के लिये, मुँह बन्द होना भी ज़रूरी,
मौन रह कर सहमति भी, रिश्तों के लिये है यहाँ।

— अ. कीर्तिवर्द्धन