बेरहम होती ख्वाहिशें
रात की खामोशी
दिल की गहराई में गूंजती
अधूरी आस
सन्नाटा बोले
छुपे सपनों की परतें
टूटते मन के रंग
पवन की सरसराहट
भूले हुए रास्तों में
उम्मीद की लौ
चाँद की चाँदनी
टूटे तारे संग बहती
ख्वाहिशों की नदियाँ
सुरज की किरणें
अंधेरों में राह दिखाए
नई सुबह आए
पक्षियों की उड़ान
सपनों को छू लेती है
अदृश्य उड़ान
फूलों की खुशबू
भूले हुए वादों में
सुकून लौटाए
सागर की लहरें
मन की बेचैन राहों में
सपनों को लहराए
— डॉ. अशोक
