बाल कविता

परीक्षा की घड़ी

परीक्षा की घड़ी आई।
सोचो बच्चो करो पढ़ाई।।
सुबह-सुबह उठकर पढ़ना।
मन को बिल्कुल नहीं टालना।।
किताब हमारी सच्ची दोस्त।
ज्ञान दिलाए हर दिन रोज़।।
डर को दूर भगाओ अब।
हिम्मत से तुम लिखना सब।।
मेहनत से जो आगे बढ़ता।
सपनों का सूरज वही चढ़ता।।
माँ-पापा का मान बढ़ाओ।
शिक्षक जी को गर्व दिलाओ।।
आज जो मन से पढ़ जाए।
कल मुस्कान खुद आए।।
परीक्षा की घड़ी आई।
सोचो बच्चों करो पढ़ाई।।
अनुशासन को अपनाएँ।
आत्मविश्वास को गले लगाएँ।।
गिरें अगर तो डर न जाएँ।
फिर से आगे बढ़ते जाएँ।।
आज की मेहनत रंग लाए।
कल का भविष्य रच जाए।।
सपनों को सच कर जाएँ।
पूरी लगन से पढ़ जाएँ।।

— डॉ. प्रियंका सौरभ

*डॉ. प्रियंका सौरभ

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, (मो.) 7015375570 (वार्ता+वाट्स एप) facebook - https://www.facebook.com/PriyankaSaurabh20/ twitter- https://twitter.com/pari_saurabh