विश्रान्ति
ताकतवर बनने की महत्वाकांक्षा में एक राष्ट्राध्यक्ष परमाणु परीक्षण करता जा रहा हैं। वह सबसे शक्तिशाली राष्ट्राध्यक्ष है। उसे देख उसके नेतृत्व में धीरे-धीरे अन्य राष्ट्राध्यक्ष भेड़ चाल में शामिल होते जा रहे हैं। उनमें से एक छोटे राष्ट्राध्यक्ष ने पूछा, ” यह अंधी दौड़ हमें कहाँ ले जायेगी?”
उसने जवाब दिया, “तुम चुपचाप आँखें मूँदकर मेरे पीछे चलो। सुरक्षित रहोगे। यह परमाणु-परीक्षण विश्व-शांति के आवश्यक है।”
“आँखें मूँदने से दिशाहीनता की सम्भावना है। मुझे तो चारो ओर अँधेरा दिखाई दे रहा है,” छोटे राष्ट्राध्यक्ष ने कहा।
यह सुनकर वह घमंड से बोला,”हमारा देश सबसे शक्तिशाली हैं। हम चाहे तो तुम्हारे छोटे से देश का अस्तित्व ही समाप्त कर सकते हैं।”
छोटे राष्ट्राध्यक्ष ने आँखें खोली और निर्भीकता से कहा,” यह मालूम है मुझे। तुम्हारी ताकत हमें मिटा सकती है पर हमारे विचारों को नहीं और विचारों को मिटाना इतना आसान नहीं है।”
यह सुनकर शक्तिशाली राष्ट्राध्यक्ष को एक झटका लगा। उसे एहसास हुआ कि उसकी ताकत उसे अंधा बना रही है। उसने आँखें खोली तो देखा कि सामने शांति मुस्कुरा रही है।
— डाॅ. अनीता पंडा ‘अन्वी’
