ग़ज़ल
इसको झुठलाना धोखा है भाई जी
अति का अंत बुरा होता है भाई जी
जीवन नर्क बना देता है कलियुग में
सच कहना भी एक नशा है भाई जी
दौलत शुहरत है तो रिश्ता है वर्ना
कौन यहाँ किसका अपना है भाई जी
यूँ मत सबको अपने मन की बात बता
जाने किसके मन में क्या है भाई जी
दिल के ज़िद्दी दर्दो ग़म की दुनिया में
हँसना ही बस एक दवा है भाई जी
हो पाए तो इसको छोटा ही रखना
तुझमे जो छोटा बच्चा है भाई जी
कमज़ोरी का हिस्सेदार नही कोई
रुतबे में सबका हिस्सा है भाई जी
— सतीश बंसल
