नन्हा सा खिलाड़ी
नन्हे हाथ में नीला बल्ला,
आँखों में सपनों का हल्ला।
सड़क बनी है आज मैदान,
खेल रहा है छोटा शैतान।।
बैटमैन वाली प्यारी शान,
जैसे आया कोई महान।
गेंद गिरी है पास कहीं,
हिम्मत इसकी कम न हुई।।
हँसी छुपी है होठों में,
खुशी बसी है कदमों में।
बचपन बोले—खेल ही खेल,
यही तो जीवन का है मेल।।
— डॉ. सत्यवान सौरभ
