गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बन सके न रोटी आटे बिना।
गुलाब रहता नहीं काँटे बिना।।

सफलता मिलती है मुश्किल से।
व्यापार होता नहीं घाटे बिना।।

श्वान रहे पालतू ही परिवार में।
श्वान प्यार करता नहीं चाटे बिना।।

छुपाओ नहीं ज़ख्म अपनों से।
दर्द कैसे घटेगा बाँटे बिना।।

प्यार से समझाओ सदा ही सुनो।
सुधर सकते हैं बच्चे चाँटे बिना।।

— रवि रश्मि ‘अनुभूति’