गीत/नवगीत

बाग में स्कूल

इस बगीचे में देखो कितने सुन्दर फूल,
नन्ही नन्हीं कलियों के संग डाले रही हैं झूल

प्यारा प्यारा बाग हैं कितना, तितली रंग बिरंगी,
फूलों के रंग कितने प्यारे, लगते हैं सतरंगी,
आओ! गुम हो जाएं इनमें, बाक़ी सब कुछ भूल ।

इस बगीचे में ठंडी शीतल छायां,
मन को कितना लुभाती हैं,
प्यारे बच्चे खेलें यहां पे, खुशियां शोर मचाती हैं।
दिल को लुभाते हैं, मनमोहक ये फूल।

इस बगीचे में प्राण वायु देती सबको,
बाग की ये हरियाली, जीवन में खुशियां लाती हैं,
दुःख में भी मुस्कान सिखाते, फूलों के संग में शूल ।

— आसिया फारूकी

*आसिया फ़ारूक़ी

राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका, प्रधानाध्यापिका, पी एस अस्ती, फतेहपुर उ.प्र