गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल -सभी से प्यार होली में

चलो कर के दिखाएं हम सभी से प्यार होली में।
मुहब्बत हम करें सब से नहीं तकरार होली में।

नहीं है गैर इस जग में, सभी अपने दुलारे हैं,
मनाएं मिल रॅंगों का आज यह त्यौहार होली में।

नहीं हो भेद जाती का, मिटा दे वैर नफरत को,
सभी हम एक हैं भाई, रॅंगें परिवार होली में।

बॅंटेगें हम नहीं अब तो रहेंगे साथ मिल जुल के,
दिखा दें प्यार दुनिया को अजी इस बार होली में।

नहीं है रोक मिलने में खुले आजाद पंछी हम,
चलो खेले सखी मिल प्रेम की बौछार होली में।

— शिव सन्याल

*शिव सन्याल

नाम :- शिव सन्याल (शिव राज सन्याल) जन्म तिथि:- 2/4/1956 माता का नाम :-श्रीमती वीरो देवी पिता का नाम:- श्री राम पाल सन्याल स्थान:- राम निवास मकड़ाहन डा.मकड़ाहन तह.ज्वाली जिला कांगड़ा (हि.प्र) 176023 शिक्षा:- इंजीनियरिंग में डिप्लोमा लोक निर्माण विभाग में सेवाएं दे कर सहायक अभियन्ता के पद से रिटायर्ड। प्रस्तुति:- दो काव्य संग्रह प्रकाशित 1) मन तरंग 2)बोल राम राम रे . 3)बज़्म-ए-हिन्द सांझा काव्य संग्रह संपादक आदरणीय निर्मेश त्यागी जी प्रकाशक वर्तमान अंकुर बी-92 सेक्टर-6-नोएडा।हिन्दी और पहाड़ी में अनेक पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। Email:. Sanyalshivraj@gmail.com M.no. 9418063995