नन्हा मुन्ना रजाई में
नन्हा बच्चा जाग गया,
रजाई में मुस्काया।
धीरे-धीरे आँखें खोली,
मम्मी को बुलाया।
नरम-नरम सी रजाई है,
उसमें छिपकर खेले।
कभी इधर तो कभी उधर,
हँसते-हँसते डोले।
रंग-बिरंगा प्यारा सूट,
डायनासोर वाला।
नन्हा मुन्ना चंचल बच्चा,
घर का है उजाला।
गोल-गोल सी उसकी आँखें,
चमके जैसे तारे।
सब कहते हैं प्यार से उसको,
हमारे राज-दुलारे।
— डॉ. प्रियंका सौरभ
