गीत/नवगीत

फागुन

वासंती ने प्रीत सिखाया,
उफ्फ, फागुन द्वारे पर आया।
बिखरे-बिखरे से हैं पलाश,
आम्र मंजर भी बौराया।
उफ्फ, फागुन द्वारे पर आया।

रमणी-मुख पर सोहे अंजन,
फागुन से तन-मन अतिरंजन।
रंग दिया था तुमने कैसे
सोच- सोच कर सिहरी काया।
उफ्फ, फागुन द्वारे पर आया।

गुज़रा वह क्षण याद मदन क्या,
कितना करते थे मनुहार।
सकुचाती, शर्माती सी मैं
दिल अपना तो गई थी हार।
नैनों से कर नेह की बारिश,
मीत ने प्रीत से था नहलाया।
उफ्फ, फागुन द्वारे पर आया।
उफ्फ्फ… फागुन द्वारे पर आया।

— डॉ. सविता सिंह मीरा

*सविता सिंह 'मीरा'

जन्म तिथि -23 सितंबर शिक्षा- स्नातकोत्तर साहित्यिक गतिविधियां - विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित व्यवसाय - निजी संस्थान में कार्यरत झारखंड जमशेदपुर संपर्क संख्या - 9430776517 ई - मेल - meerajsr2309@gmail.com