प्रोजेक्ट गंगा : उत्तर प्रदेश के ग्रामीण भारत को डिजिटल क्रांति की नई धारा
8 मार्च 2026 को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर लॉन्च हुए ‘प्रोजेक्ट गंगा’ ने उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा घोषित यह 3,349 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना राज्य के सभी 75 जिलों के 1,05,000 से अधिक गांवों में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड इंटरनेट पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। यह परियोजना केवल तारों और टॉवरों की कहानी नहीं है — यह उस 6.5 करोड़ ग्रामीण आबादी की कहानी है, जो दशकों से डिजिटल विभाजन के दूसरे छोर पर खड़ी रही है।
प्रोजेक्ट गंगा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल इंटरनेट कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक समग्र डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की परिकल्पना है। बजट आवंटन इस बात का प्रमाण है — 1,500 करोड़ रुपये अवसंरचना विकास के लिए, 1,000 करोड़ रुपये डिजिटल सेवा केंद्रों की स्थापना के लिए और शेष 849 करोड़ रुपये प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण तथा दीर्घकालिक रखरखाव के लिए निर्धारित हैं।
तकनीकी ढांचे की बात करें तो परियोजना गीगाबिट पैसिव ऑप्टिकल नेटवर्क तकनीक पर आधारित है, जो फाइबर-टू-द-होम कनेक्टिविटी सुनिश्चित करती है। यह तकनीक इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इस नेटवर्क में एक ही ऑप्टिकल फाइबर लाइन से 32 से 128 घरों तक इंटरनेट पहुँचाया जा सकता है, जिससे प्रति कनेक्शन लागत उल्लेखनीय रूप से कम हो जाती है। इसके साथ ही यह पाँचवीं पीढ़ी के दूरसंचार टावरों के साथ एकीकृत होगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में 50 मेगाबिट प्रति सेकंड अपलोड-डाउनलोड गति उपलब्ध होगी।
गंगा एक्सप्रेसवे के साथ एकीकरण इस परियोजना का एक रणनीतिक पहलू है। 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज तक फैला है और नौ जिलों — मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अलीगढ़, कासगंज, फर्रुखाबाद, कन्नौज, हरदोई और उन्नाव — से होकर गुजरता है। इस मार्ग के किनारे ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाना न केवल लागत प्रभावी है, बल्कि यह एक प्रकार का ‘डिजिटल कॉरिडोर’ भी बनाता है, जो औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों को सीधे डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ता है।
उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण और भारत संचार निगम लिमिटेड के संयुक्त प्रयासों से 2,000 कृत्रिम बुद्धिमत्ता-सक्षम डेटा केंद्र स्थापित होंगे, जो कृषि डेटा विश्लेषण और स्वास्थ्य टेलीमेडिसिन के लिए उपयोगी साबित होंगे। पहले चरण में मेरठ, सहारनपुर, आगरा और प्रयागराज मंडलों के 20,000 गांवों को लक्षित किया गया है, जहाँ 5,000 किलोमीटर नई फाइबर लाइन बिछाई जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि जून 2026 तक 50 प्रतिशत कवरेज और दिसंबर 2027 तक पूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित हो, जिसके अंतर्गत 50,000 सामान्य सेवा केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
भारत में कृषि क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या मध्यस्थों की लंबी श्रृंखला रही है, जो किसान और बाजार के बीच आकर उत्पादक का मुनाफा खा जाती है। केंद्र सरकार द्वारा 2016 में शुरू किया गया राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) मंच इसी समस्या का समाधान करने के लिए बना था। वर्तमान में राष्ट्रीय कृषि बाजार से देश की 1,000 से अधिक कृषि मंडियां जुड़ी हुई हैं और इस पर पंजीकृत किसानों की संख्या 1.75 करोड़ से अधिक है।
प्रोजेक्ट गंगा के तहत सहारनपुर जिले के 500 गांवों में किए गए पायलट प्रोजेक्ट का अनुभव उत्साहजनक है। वहाँ रियल-टाइम मंडी डेटा उपलब्ध होने से किसानों को अपनी उपज के राष्ट्रीय कृषि बाजार मंच पर 20 प्रतिशत अधिक मूल्य प्राप्त हुए। ड्रोन-आधारित कृषि सलाह प्रणाली से 15 प्रतिशत उत्पादकता वृद्धि का अनुमान है।
उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा गेहूं, गन्ना और आलू उत्पादक राज्य है। कृषि क्षेत्र यूपी की सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 24 प्रतिशत का योगदान देता है और राज्य की 60 प्रतिशत से अधिक श्रमशक्ति इसी पर निर्भर है। ऐसे में यदि डिजिटल कनेक्टिविटी कृषि उत्पादकता में मात्र 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि करे, तो यह राज्य की अर्थव्यवस्था पर कई हजार करोड़ रुपये का सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
‘गंगा डिजिटल बटुआ’ ऐप, जो 5 करोड़ लाभार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण से जोड़ेगा, इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। केंद्र सरकार की प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण योजनाओं के तहत 2023-24 में 7.29 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में स्थानांतरित की गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 9 प्रतिशत अधिक थी। उत्तर प्रदेश इस योजना का सबसे बड़ा लाभार्थी राज्य रहा है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 डिजिटल शिक्षा को भविष्य की शिक्षा प्रणाली का अभिन्न अंग मानती है। प्रोजेक्ट गंगा के तहत 50,000 स्कूलों में डिजिटल कक्षाएं स्थापित होंगी, जिससे प्रधानमंत्री ई-विद्या पोर्टल के माध्यम से 10 लाख छात्र जुड़ेंगे।
शिक्षा की वार्षिक स्थिति रिपोर्ट 2023 के अनुसार, उत्तर प्रदेश के ग्रामीण सरकारी स्कूलों में कक्षा 5 के केवल 44 प्रतिशत बच्चे ही कक्षा 2 स्तर का पाठ पढ़ पाते हैं। डिजिटल कक्षाएं और ऑनलाइन शिक्षण सामग्री इस सीखने की कमी को पाटने में सहायक हो सकती है।
कोविड-19 महामारी ने डिजिटल शिक्षा की जरूरत को बड़े कटु अनुभव से रेखांकित किया था। 2020-21 में जब देश भर के स्कूल बंद हुए, तो ग्रामीण क्षेत्रों के लाखों बच्चे ऑनलाइन शिक्षा से वंचित रह गए, क्योंकि उनके घरों में न स्मार्टफोन था, न इंटरनेट। प्रोजेक्ट गंगा इस खाई को पाटने का एक सुनियोजित प्रयास है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में 1,000 मोबाइल टेलीमेडिसिन वैन की योजना अत्यंत महत्वपूर्ण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक के अनुसार प्रति 1,000 व्यक्तियों पर 1 चिकित्सक होना चाहिए, किंतु भारत के ग्रामीण इलाकों में यह अनुपात अत्यंत प्रतिकूल है। टेलीमेडिसिन इस अंतर को भरने का सबसे व्यावहारिक और लागत प्रभावी समाधान है। कोविड काल में ई-संजीवनी मंच पर देश भर में 10 करोड़ से अधिक दूरस्थ परामर्श हो चुके हैं, जो इस मॉडल की सफलता को स्वयं प्रमाणित करता है। ग्रामीण महिलाओं के लिए ये मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयाँ विशेष रूप से लाभकारी होंगी, क्योंकि सामाजिक कारणों से वे प्राय : दूर के अस्पताल नहीं जा पातीं।
प्रोजेक्ट गंगा के तहत 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार का लक्ष्य — जिसमें 4 लाख डिजिटल कौशल प्रशिक्षक, 3 लाख सामान्य सेवा केंद्र संचालक और 3 लाख स्वतंत्र सूचना-प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ शामिल हैं — महत्वाकांक्षी तो है, किंतु असंभव नहीं। इन्हें राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के अंतर्गत 6 महीने का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
यह समझने के लिए कि सामान्य सेवा केंद्र मॉडल कितना प्रभावशाली हो सकता है, राष्ट्रीय आंकड़ों पर नजर डालना उचित होगा। केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत देश भर में 5 लाख से अधिक सामान्य सेवा केंद्र कार्यरत हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों में 300 से अधिक सरकारी और गैर-सरकारी सेवाएं प्रदान करते हैं। इन केंद्रों पर प्रतिदिन औसतन 1 करोड़ से अधिक लेनदेन होते हैं। उत्तर प्रदेश में 50,000 नए सामान्य सेवा केंद्र स्थापित होने से यह नेटवर्क और अधिक सघन व प्रभावी हो जाएगा।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए डिजिटल कनेक्टिविटी का महत्व भी रेखांकित करने योग्य है। उत्तर प्रदेश में इस क्षेत्र में लगभग 90 लाख उद्यम हैं, जो राज्य के कुल रोजगार के एक बड़े हिस्से का सृजन करते हैं। इनमें से अधिकांश उद्यमों की इलेक्ट्रॉनिक-वाणिज्य तक पहुँच नहीं है। 50 लाख सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को इलेक्ट्रॉनिक-वाणिज्य मंचों से जोड़कर 25,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त कारोबार का लक्ष्य तभी प्राप्त होगा, जब इन उद्यमों को डिजिटल उपकरण अपनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण मिले।
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण के अनुमान के अनुसार, यदि परियोजना का पूर्ण क्रियान्वयन होता है, तो उत्तर प्रदेश का डिजिटल सकल घरेलू उत्पाद योगदान 15 प्रतिशत तक बढ़ सकता है — 2025 के 8 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपये तक। राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर एवं सेवा कंपनियां संघ की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल अर्थव्यवस्था भारत की सकल घरेलू उत्पाद में 2026 तक 10 प्रतिशत योगदान देने की राह पर है। उत्तर प्रदेश, जो भारत की सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 9 प्रतिशत का योगदान देता है, यदि डिजिटल क्षेत्र में तेज वृद्धि दर्ज करे तो पूरे देश के आर्थिक परिदृश्य पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
गंगा एक्सप्रेसवे के साथ एकीकरण से 12 जिलों में 20 औद्योगिक केंद्र विकसित होंगे, जो नोएडा मॉडल पर आधारित होंगे। इससे 5 लाख करोड़ रुपये के निवेश को आकर्षित करने का लक्ष्य है। मैकेंज़ी ग्लोबल इंस्टीट्यूट की एक शोध रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं की पहुँच से भारत की सकल घरेलू उत्पाद में 1 प्रतिशत तक अतिरिक्त वृद्धि संभव है।
प्रोजेक्ट गंगा की एक विशेष उपलब्धि यह है कि इसे अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर लॉन्च किया गया और 40 प्रतिशत सामान्य सेवा केंद्र महिलाओं को सौंपने का निर्णय किया गया, जिससे 2 लाख महिला उद्यमी उभरने की संभावना है।
भारत में महिलाओं की इंटरनेट पहुँच पुरुषों की तुलना में काफी कम है। जीएसएमए की 2023 की ‘मोबाइल लैंगिक अंतर रिपोर्ट’ के अनुसार, भारत में महिलाओं और पुरुषों के बीच मोबाइल इंटरनेट उपयोग में 40 प्रतिशत का अंतर है — यह दक्षिण एशिया में सबसे अधिक लैंगिक डिजिटल विभाजन में से एक है। ग्रामीण महिलाओं में यह अंतर और भी गहरा है।
जब महिलाएं सामान्य सेवा केंद्र संचालक बनती हैं, तो वे न केवल आर्थिक रूप से स्वतंत्र होती हैं, बल्कि अपने गांव की अन्य महिलाओं के लिए डिजिटल साक्षरता की मार्गदर्शक भी बन जाती हैं। झारखंड, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में महिला सामान्य सेवा केंद्र संचालकों के अनुभव से पता चला है कि जब महिलाएं इन केंद्रों का संचालन करती हैं, तो अन्य महिलाओं की डिजिटल सेवाओं तक पहुँच उल्लेखनीय रूप से बढ़ जाती है। ग्रामीण युवाओं में डिजिटल साक्षरता 50 प्रतिशत से बढ़कर 90 प्रतिशत तक पहुँचाने का लक्ष्य शहरों की ओर पलायन रोकने में भी सहायक होगा।
प्रोजेक्ट गंगा एक महत्वाकांक्षी, समयोचित और आवश्यक पहल है। इसके मूल में एक गहरी सच्चाई है — आज की दुनिया में इंटरनेट एक विलासिता नहीं, बल्कि मूलभूत अवसंरचना है, जैसे सड़क, बिजली या पानी। किंतु यह भी उतनी ही बड़ी सच्चाई है कि भारत में ऐसी परियोजनाओं का इतिहास घोषणाओं और जमीनी हकीकत के बीच की दूरी से भरा पड़ा है। भारतनेट जैसे कार्यक्रम, जो 2011 में शुरू हुए, 2026 में भी पूर्णतः क्रियान्वित नहीं हो सके हैं। इसलिए सरकार-नागरिक भागीदारी, पारदर्शी जवाबदेही और नियमित प्रगति समीक्षा इस परियोजना की सफलता की अनिवार्य कुंजी होगी। प्रोजेक्ट गंगा यदि अपने निर्धारित लक्ष्यों का आधा भी हासिल कर ले, तो भी उत्तर प्रदेश के करोड़ों ग्रामीण जीवन में एक अभूतपूर्व बदलाव आएगा। वह बदलाव जो किसी को उसकी फसल का उचित दाम दिलाएगा, किसी बच्चे को बेहतर शिक्षा देगा, किसी महिला को उद्यमी बनाएगा और किसी बीमार को समय पर चिकित्सक से जोड़ेगा। गंगा केवल एक नदी नहीं है — यह भारत की आस्था, संस्कृति और जीवन का सनातन प्रतीक है। ‘प्रोजेक्ट गंगा’ इस प्रतीक को एक नया अर्थ देने का प्रयास है — डिजिटल ज्ञान और अवसर की एक ऐसी धारा, जो हर गांव तक पहुँचे, हर घर को रोशन करे और हर नागरिक को उसके अधिकार और संभावना से जोड़े। यही इस परियोजना की आत्मा है और यही भारत के ग्रामीण पुनर्जागरण का मार्ग भी।
— डॉ. शैलेश शुक्ला
