शिकायत
न मुझे वक्त से शिकायत थी
न मुझे किसी शख्स से शिकायत थी
न मुझे जिंदगी से शिकायत थी
मुझे शिकायत थी खुद की किस्मत से
न मुझे किसी के कहना से कुछ फर्क पड़ता था
न किसी के चले जाने से फर्क पड़ता था
न मुझे किसी के बदल जाने से फर्क पड़ता था
मुझे फर्क पड़ता था जब जिन्दगी में अपने ही बदल जाए ..
— गंगा मांझी
