कविता

कविता

तुम्हें लगता है कि तुम्हारे सिवा मुझे कोई देखता ही नहीं
पर सच तो ये है कि मेरे पीछे भी कई नज़रें ठहरती हैं
फर्क बस इतना है कि मैं हर किसी पर दिल नहीं हारता
मेरी नज़र तो आज भी सिर्फ तुम्हीं पर ठहरती
तुम कई लोगों से हँस-हँस कर बातें करती हो
और मुझसे बस वक़्त मिलने पर याद करती हो
काश समझ पाती तुम मेरी इस खामोशी को
मैं चाहूँ तो हजारों मिल जाएँ…
पर मैं आज भी सिर्फ तुम्हें ही चुनता हूँ

— हेमंत सिंह कुशवाह

हेमंत सिंह कुशवाह

राज्य प्रभारी मध्यप्रदेश विकलांग बल मोबा. 9074481685