हर उत्तर अपने भीतर ढूंढने की कोशिश
सन्नाटा पोखर का,
प्रभात की लहरें नाचें,
सत्य फुसफुसाता।
ऊँचे पर्वत शिखर,
बादल बहते विचारों संग,
उत्तर भीतर हैं।
पतझड़ की पत्तियाँ,
हर एक कहती है कहानी,
खुद में खोजो ज्ञान।
सवेरे की हल्की हवा,
मन को हिलाए, दिल को शांत करे,
बुद्धि धीरे जागे।
नदी बहती जाए,
पत्थरों और पुलों के नीचे,
यात्रा रास्ता दिखाए।
चेर्री के फूल खिले,
नाजुक सुंदरता में छिपा सच,
आत्मा में देखो।
नरम रेत पर कदम,
हर कदम छोड़ता निशान,
सीख संग चलता रहे।
शाम की आग की गर्मी,
दीवारों पर छाया नाचे,
उत्तर भीतर चमकते।
चांदनी शांत झील,
आकाश और दिल को दिखाए,
खोजो, तो पाओगे।
एकांत पथ पर,
जंगल में सन्नाटा फुसफुसाए,
अपने आप को सुनो।
पतझड़ की बहती हवा,
छिपे विचारों के बीज ले आए,
मन में बो दो।
शांत रात का आगमन,
तारे धैर्यपूर्वक चमकें,
भीतर खोज की राह दिखाएं।
दिल के भीतर गहराई,
संसार तुम्हारा इंतजार करे,
देखो, और सत्य आए।
— डॉ. अशोक
