नन्ही सवारी
नन्हे-नन्हे दो बच्चे,
मोटर पर बैठे अच्छे।
आगे बैठा भैया प्यारा,
पीछे बैठा भाई न्यारा।
धीरे-धीरे चलती गाड़ी,
देखो कितनी प्यारी सवारी।
हँसते-हँसते जाएँ आगे,
मस्ती उनके संग ही भागे।
हवा लगे तो हँसी आए,
मोटर आगे बढ़ती जाए।
छोटे-छोटे मीठे सपने,
दोनों लगते कितने अपने।
मिलकर दोनों करें सवारी,
खुशियों की है यह पिटारी।
नन्ही दुनिया, नन्हे यार,
बचपन कितना है गुलज़ार।
— डॉ. सत्यवान सौरभ
