मेरा छोटा ट्रैक्टर
छोटा सा ट्रैक्टर हमारा है,
मुझको बहुत ये प्यारा है।
लाल-हरा रंग इसका है,
देखो कितना न्यारा है।
आगे-पीछे चलता जाए,
घर में ही खेत बन जाए।
मैं भी इसके संग खेलूँ,
हँसू-गाऊँ, खुशियाँ ले लूँ।
नन्हे हाथों से चलाऊँ,
धीरे-धीरे इसे घुमाऊँ।
कभी रुकाऊँ, कभी चलाऊँ,
खेल-खेल में सीख भी जाऊँ।
मेरा प्यारा खेल-खिलौना,
इससे अच्छा कुछ ना होना।
— डॉ. प्रियंका सौरभ
