भजन/भावगीत

या देवी सर्वभूतेषु

जहां स्त्री वहां सृजन शक्ति
न सिर्फ जनन प्राण-शक्ति
संचालिका ऊर्जा प्रशक्ति
दैवीय मूर्ति प्रति भक्ति
ना प्रतीकों प्रति आसक्ति
दैविय मंत्रों की पंक्ति
समझे अर्थ गर व्यक्ति
बुद्धि निद्रा शांति स्तुति
तृष्णा दया चेतना स्मृति
संहार कर पशुत्व वृत्ति
क्रोध मद मोह मुक्ति
प्रतीकों की गढ़ें आकृति
प्रकट हो दैवीय पराशक्ति
अंधकार प्रकाश, पुरुष स्त्री
संतुलन हेतु रची सृष्टि
सर्व मंगल मांगल्ये दैव शक्ति।

— नील मणि

नील मणि

एक कार्टूनिस्ट और लेखक के रूप में सामाजिक, राजनीतिक और पारिवारिक जीवन के विविध रंगों को अपने व्यंग्य, रेखाचित्रों, कविताओं और कहानियों के माध्यम से जीवंत करने की कोशिश में हूँ। स्वतंत्र लेखन में संलग्न हूँ। मेरी रचनाएँ व कार्टून्स विभिन्न प्रतिष्ठित, सरकारी, देश-विदेश की पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रही हैं। मोबाइल नंबर -9412708345 मेरठ – 250001 (उत्तर प्रदेश)