गीतिका
विश्व सोया हमें जगाना है।
विश्व गुरु देश को बनाना है।।
आज बर्बाद युद्ध से मानव,
युद्ध भीषण हमें बचाना है।
आज सुनता नहीं जगत प्राणी,
पाठ वसुधा-कुटुम्ब फिर पढ़ाना है।
आग परमाणु की लगी भारी,
आज कोशिश करें बुझाना है।
नष्ट होगी सदा-सदा दुनियाँ,
प्राण मासूम के बचाना है।
काल करता विनाश की लीला,
आज भारत हमें बचाना है।।
— डॉ. ओम प्रकाश मिश्र मधुब्रत
