Author: डॉ. ओम प्रकाश मिश्र मधुब्रत

मुक्तक/दोहा

महीयसी महादेवी जी के परिनिर्वाण दिवस पर चार मौलिक मुक्तक

1.नीरजा में जो विरह राग लिखा, हे महादेवी तुमको प्रणाम |यामा में जो पीड़ा का साज लिखा, हे महादेवी तुमको

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भाषा-साहित्य

सृजन और समीक्षा: एक दूसरे के पूरक

सृजन और समीक्षा दो ऐसे पहलू हैं जो किसी भी रचनात्मक प्रक्रिया के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। सृजन वह प्रक्रिया

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