महीयसी महादेवी जी के परिनिर्वाण दिवस पर चार मौलिक मुक्तक
1.
नीरजा में जो विरह राग लिखा, हे महादेवी तुमको प्रणाम |
यामा में जो पीड़ा का साज लिखा, हे महादेवी तुमको प्रणाम |
करुणा ममता की मूर्ति सजल यामा की चंद्रोज्ज्वला हास,
छायावाद की करुणा का इतिहास लिखा, हे महादेवी तुमको प्रणाम ||
2.
ममता की मूरत करुणा की धारा, हे महादेवी तुमको प्रणाम |
नारी हृदय का तुमने दर्द विचारा, हे महादेवी तुमको प्रणाम |
गद्य में अतीत के चलचित्र दिखाए,
साहित्य में संवेदना को संवारा, हे महादेवी तुमको प्रणाम ||
3.
प्रयाग की धरती तुमसे पावन हुई, हे महादेवी तुमको प्रणाम |
विद्यापीठ की ज्योति तुमसे सजग हुई, हे महादेवी तुमको प्रणाम |
श्वेत वसना, वीणा पाणि की प्रतिमा,
हिन्दी की गरिमा तुमसे सावन हुई, हे महादेवी तुमको प्रणाम ||
4.
आधुनिक मीरा का तुम्हें मान मिला, हे महादेवी तुमको प्रणाम |
ज्ञानपीठ का सर्वोच्च सम्मान मिला, हे महादेवी तुमको प्रणाम |
दीपशिखा सी जलती रही जीवन भर,
तुमसे ही हिन्दी को अभिमान मिला, हे महादेवी तुमको प्रणाम ||
— आचार्य डॉ. ओम प्रकाश मिश्र मधुब्रत
