बाल कविता

नन्हा सा खरबूज

एक हरा-भरा बाग,
कोयल गाए राग।
गाड़ी में बैठा बच्चा,
देखे आगे भाग।

गोद में गोल खरबूज,
मन में मीठा साज,
छोटी-सी उँगली से,
छेड़े इसका राज।

कुतर-कुतर कर खाए,
रस टपके हर बार,
गालों पर मुस्कान,
आँखों में त्यौहार।

अहा! हुआ मालामाल,
मीठा-मीठा हर ख्याल,
बीज छोटे-छोटे जैसे,
तारों की हो डाल।

मीठे रस का थाल,
भाए न अब कुछ और,
हँसी-ठिठोली संग में,
खुशियों का है जोर।

मिट गई सबकी प्यास,
बढ़ी खुशी की आस,
नन्हा सा ये बचपन,
सबसे खास, सबसे खास।

— डॉ. प्रियंका सौरभ

*डॉ. प्रियंका सौरभ

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, (मो.) 7015375570 (वार्ता+वाट्स एप) facebook - https://www.facebook.com/PriyankaSaurabh20/ twitter- https://twitter.com/pari_saurabh