कारवां पुराने यादों की
धुंधली राहें
बीते पलों की
मीठी आहट
पुरानी गली
हंसी की गूंज
खामोश दरख़्त
पीली चिट्ठियां
अधूरी बातें
दिल की खुशबू
साँझ का साया
यादों की छाया
धीमी सरगम
बरसों बाद
वही मुस्कान
भीगी पलकें
टूटी कड़ियाँ
फिर भी जुड़ी
रिश्तों की डोर
खोए लम्हे
समेटे हुए
मन का आंगन
चलता कारवां
समय के संग
जीवन संदेश
— डॉ. अशोक
