अंधा बांटे रेवड़ी, फिर फिर अपने को दे
कहने को तो सांसद और विधायक जन सेवा प्रतिनिधि कहलाते हैं, पर, मेरे विचार से सांसदों और विधायकों को जो हर प्रकार की सुविधा, पेंशन ,कम दरों पर कैंटीन मे खाना टोल टैक्स में छूट,आवास, और अन्य प्रकार की सुविधा दी जा रही हैं वह सर्वदा अनुचित है। आखिर क्यों।
अगर कोई सांसद या विधायक गरीबी रेखा से नीचे है, तो इस प्रकार की सुविधा के लिए सोचा जा सकता है लेकिन लेकिन अच्छे और संपन्न सांसद विधायक भी इस सुविधा का पूरा लाभ उठाते हैं या हम समझते हैं कि लाभ का नाजायज फायदा उठाते हैं।
भारतीय सेवा में काम करने वाली सैनिकों , जवानों और अफसरों को भी कुछ सुविधा प्राप्त होती हैं लेकिन विधायकों और सांसदों को मिलने वाली सुविधाओं के सामने यह बहुत कम है।
यह आम जनता के द्वारा इकट्ठा किया हुआ टैक्स का पैसा ही है जो इस तरह से इन पर खर्च होता है।
गरीब से गरीब व्यक्ति को भी किसी प्रकार की सुविधा या राहत नहीं मिलती लेकिन यह अमीर कुछ ज्यादा ही ऐश करते हैं।
यह एक विचार का विषय है, और इस पर कोई कानून बनना चाहिए।
मैं तो यह समझता हूं कि जो भी सरकार या पार्टी इस प्रकार की सुविधाओं को बंद करने में कदम उठाएगी , उसे आम जनता का भरपूर सहयोग मिलेगा।
आपका क्या विचार है।
धन्यवाद।
— जय प्रकाश भाटिया
