ग़ज़ल
रूठ कर बेवजह वो सताने लगे।
खौफ बन कर सदा याद आने लगे।
साथ खाते रहे साथ पीते रहे,
हम नशीं कर मुखालिफ डराने लगे।
दो घड़ी छोड़ के हम जुदा क्या हुए,
गैर से इश्क अपना लड़ाने लगे।
भूल उन की हुई दोष हम को मढ़ें,
बात सच की चली मुख छुपाने लगे।
छोड़ मुझ को गये “शिव” बुरे हाल थे,
देख दौलत मुहब्बत जताने लगे।
— शिव सन्याल
