सलीब पे प्रेम के दाता
ये हैं त्याग की गाथा, दर्द की कहानी,
आज भी सुनाती है हर इक निशानी।
कैसे सलीब पे यूं लटके प्रेम के दाता,
धरा पे मानवता के वो सच्चे विधाता।
सर पे कांटों का ताज़ नैनो में करुणा,
हर ‘पीड़ा’ में उनकी दिखती साधना।
प्रभु ने अपनों के लिए सब कुछ सहा,
इतनी नफरत में भी प्यार से ही कहा।
मित्रों गुड फ्राइडे हमें यहीं है सिखाता,
क्षमा करने से ही जीवन महक जाता।
त्याग, दया व प्रेम का ‘ईशु’ देते संदेश,
यहीं है ईश्वर का सीधा-सच्चा परिवेश।
चलो आज हम भी मिलकर ‘प्रण’ करें,
नफरत की आग छोड़ प्रेम धारण करें।
हर दिल में उजालों का ‘दीपक’ जलाए,
स्नेह-प्रेम से मानवता फिर से मुस्कुराए।
— संजय एम तराणेकर
