हाइकु/सेदोका

ख़ामोशी कब ज़रूरी है

शब्द जब थक जाएँ,
मन स्वयं से बातें करे,
मौन धीरे उतर आए।

भीड़ के शोर में जब
अर्थ खोने लगें,
मौन ही सहेज ले सत्य।

पीड़ा जब गहरी हो,
आँसू शब्द न बन पाएँ,
मौन ही कहानी कहे।

क्रोध जब उमड़ पड़े,
वाणी डगमगाने लगे,
मौन ही संभाल ले।

रिश्ते जब बिखरें,
तर्क भी हार जाए,
मौन फिर जोड़ जाए।

सत्य जब कठोर हो,
दिल उसे न सह पाए,
मौन उसे सहलाए।

रात जब गहराए,
विचार उलझने लगें,
मौन उन्हें सुलझाए।

जीवन की राह में
जब दिशा न सूझे,
मौन ही प्रश्न बन जाए।

— डॉ. अशोक

डॉ. अशोक कुमार शर्मा

पिता: स्व ० यू ०आर० शर्मा माता: स्व ० सहोदर देवी जन्म तिथि: ०७.०५.१९६० जन्मस्थान: जमशेदपुर शिक्षा: पीएचडी सम्प्रति: सेवानिवृत्त पदाधिकारी प्रकाशित कृतियां: क्षितिज - लघुकथा संग्रह, गुलदस्ता - लघुकथा संग्रह, गुलमोहर - लघुकथा संग्रह, शेफालिका - लघुकथा संग्रह, रजनीगंधा - लघुकथा संग्रह कालमेघ - लघुकथा संग्रह कुमुदिनी - लघुकथा संग्रह [ अन्तिम चरण में ] पक्षियों की एकता की शक्ति - बाल कहानी, चिंटू लोमड़ी की चालाकी - बाल कहानी, रियान कौआ की झूठी चाल - बाल कहानी, खरगोश की बुद्धिमत्ता ने शेर को सीख दी , बाल लघुकथाएं, सम्मान और पुरस्कार: काव्य गौरव सम्मान, साहित्य सेवा सम्मान, कविवर गोपाल सिंह नेपाली काव्य शिरोमणि अवार्ड, पत्राचार सम्पूर्ण: ४०१, ओम् निलय एपार्टमेंट, खेतान लेन, वेस्ट बोरिंग केनाल रोड, पटना -८००००१, बिहार। दूरभाष: ०६१२-२५५७३४७ ९००६२३८७७७ ईमेल - ashokelection2015@gmail.com