शून्य की अहमियत
शून्य की गोद में
छिपा हुआ है जीवन
एक अनकहा सत्य
जहाँ कुछ भी नहीं
वहीं से सब कुछ जन्मे
नए रूप लेते हैं
खालीपन भी बोले
अपने मौन के भीतर
गहरी कहानी
अपूर्णता में ही
पूर्णता की झलक है
समझ धीरे आए
बिना शोर के भी
शून्य अपनी भाषा में
सब कुछ कह देता
अंत में भी छिपा
एक नया सा आरंभ
शून्य की रेखा में
जहाँ हम कुछ न हों
वहीं हम सब कुछ हों
यह रहस्य गहरा
— डॉ. अशोक
