बाल कहानी

पृथ्वी की सुरक्षा ढाल है ओजोन परत

गर्मी की छुट्टियाँ थीं। दस साल का विभोर अपनी छत पर बैठा आसमान देख रहा था।
विभोर (सोचते हुए)- “सूरज इतना तेज क्यों चमकता है? और मम्मी हमेशा क्यों कहती हैं कि धूप में ज्यादा मत खेलो?”
तभी उसके दादाजी पास आ गए।
दादाजी – क्या सोच रहे हो, बेटा?
विभोर – दादाजी, क्या सूरज हमें नुकसान भी पहुँचा सकता है?
दादाजी (मुस्कुराते हुए)- हाँ बेटा, लेकिन हमारे पास एक अदृश्य ढाल है—ओजोन परत।
विभोर – ओजोन परत? ये क्या होती है?दादाजी! यह पाठ तो मेरी विज्ञान की पुस्तक में भी है। लेकिन अभी पढ़ाया नहीं गया है।
दादाजी-ठीक है, तब तो हम तुम्हें अवश्य समझाएंगे। लेकिन विस्तार से तो तुम अपनी कक्षा में विज्ञान की टीचर जी से ही समझना।
“जी दादाजी “थोड़ा – सा तो समझा दो – विभोर ने अनुनयपूर्वक कहा।
दादाजी – ओजोन आसमान में बहुत ऊँचाई पर एक गैस की परत है, जो हमें सूरज की खतरनाक किरणों से बचाती है।
विभोर (आश्चर्य से)-मतलब यह हमारी सुरक्षा करती है?
दादाजी-बिल्कुल! इसे तुम पृथ्वी की “सुरक्षा ढाल” कह सकते हो।
कुछ दिनों के बाद विभोर अपनी कक्षा में गपशप कर रहा था। यह विज्ञान का पीरियड था। तभी
शिक्षिका (शीला मैडम) ने आते ही कहा – “बच्चो, आज हम ओजोन परत के बारे में पढ़ेंगे।जानना चाहते हो इसके बारे में आप सब?”
सभी बच्चों ने एक साथ कहा – जी मैडम!
विभोर (उत्साहित होकर):मैडम! क्या यह वही ओजोन परत है, जो हमें सूरज की हानिकारक किरणों से बचाती है?
शिक्षिका-हाँ, बिल्कुल सही। लेकिन आपको कैसे पता। मैंने तो अभी यह पाठ पढ़ाया ही नहीं।
विभोर – जी मैडम! ओजोन परत के बारे में एक दिन मेरे दादाजी ने मुझे जानकारी दी थी।
शिक्षिका ने विभोर को शाबाशी दी-”देखो! कितना जागरूक बच्चा है, आप लोग भी विज्ञान में रुचि रखें।”
सभी ने एक स्वर में कहा – जी मैडम!
छात्र राजीव ने कहा – “मैडम! हमें भी ओजोन परत के बारे में विस्तार से समझाइए। “
शिक्षिका – ओजोन परत पृथ्वी के वायुमंडल के समताप मंडल में लगभग 10 से 50 किलोमीटर की ऊँचाई पर पाई जाती है। यह परत मुख्यतः ओजोन (O₃) नामक गैस से बनी होती है, जो आक्सीजन के तीन परमाणुओं से मिलकर बनती है।
ओजोन परत पृथ्वी के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है, क्योंकि यह सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों को अवशोषित कर लेती है।
सुगंधा – मैडम जी! क्या ओजोन परत के कुछ और भी लाभ हैं?
शिक्षिका – हाँ, ओजोन परत एक प्रकार से हम सबकी जीवन रक्षक है। ओजोन परत के बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना लगभग असंभव है। इसके प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं, इनको नोटबुक में लिख लो और फिर याद कर लेना –
ओजोन परत अल्ट्रा वायोलेट(यूवी) किरणों से रक्षा करती है। यह यूवी-बी और यूवी – सी किरणों को रोकती है, जो अत्यंत हानिकारक होती हैं।ओजोन परत के क्षरण से त्वचा कैंसर और आँखों की बीमारियाँ बढ़ सकती हैं। यह फसलों, पेड़ों और समुद्री जीवों को नुकसान से बचाती है। यह पृथ्वी के तापमान को संतुलित रखने में सहायक है।
यश – मैडम जी! कृपया यह भी बताएँ कि ओजोन का निर्माण कैसे होता है?
शिक्षिका – बहुत अच्छा प्रश्न। आइए, इसको समझते हैं। ओजोन का निर्माण सूर्य के प्रकाश के प्रभाव से होता है। जब सूर्य की तीव्र परा बैंगनी किरणें (अल्ट्रा वायोलेट) आक्सीजन (O₂) के अणुओं को तोड़ती हैं, तो वे अलग-अलग आक्सीजन परमाणु बन जाते हैं। ये परमाणु अन्य आक्सीजन अणुओं से मिलकर ओजोन (O₃) बनाते हैं।
इस प्रक्रिया को सरल रूप में इस प्रकार समझ सकते हैं—
O₂ + सूर्य की UV किरणें → O + O
O + O₂ → O₃ (ओजोन)
रवि (कक्षा का छात्र):मैडम, अगर यह हमें बचाती है, तो क्या यह हमेशा सुरक्षित रहती है?
शिक्षिका:नहीं, यह खतरे में भी है।
पूरी कक्षा (एक साथ):कैसे मैडम?
शिक्षिका – 20वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में वैज्ञानिकों ने पाया कि ओजोन परत धीरे-धीरे पतली हो रही है, जिसे ओजोन क्षरण कहते हैं। ओजोन परत के अत्यधिक क्षरण के कारण कुछ क्षेत्रों में यह बहुत पतली हो गई है, जिसे“ओजोन छिद्र” कहा जाता है।सबसे बड़ा ओजोन छिद्र अंटार्कटिका के ऊपर पाया गया है।
इसके मुख्य कारण हैं—
(i) क्लोरोफ्लोरोकार्बन (सीएफसीएस) – इस गैस के बढ़ने से ओजोन परत की मोटाई में कमी आती है, जिससे हानिकारक अल्ट्रा वायोलेट सूरज की किरणें जैवमंडल में प्रवेश कर जाती हैं। यह गैसें रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर, एरोसोल जैसे प्रदूषकों आदि में उपयोग होती हैं। ये वायुमंडल में जाकर ओजोन को नष्ट करती हैं।
(ii) हैलोन और कार्बन टेट्राक्लोराइड –
इनका उपयोग अग्निशमन उपकरणों और औद्योगिक प्रक्रियाओं में होता है।
(iii) नाइट्रोजन आक्साइड-
यह गैसें उच्च ऊँचाई पर उड़ने वाले विमानों और औद्योगिक प्रदूषण से निकलती हैं।
अर्जुन – तो मैडम जी! इसका मतलब है कि हमें रेफ्रिजरेटर, एसी आदि उपकरण नहीं प्रयोग करने चाहिए।
शिक्षिका – अवश्य। इनका सीमित उपयोग करना ही उचित है। हमें गर्मियों में ठण्डक पाने के लिए और गर्मी का प्रकोप कम करने के लिए अधिकाधिक हरे – भरे पेड़ लगाने चाहिए।
विभोर बहुत चिंतित हो गया।
विभोर :मैडम, अगर ओजोन परत खत्म हो गई तो क्या होगा?
शिक्षिका (गंभीर होकर):तब सूरज की हानिकारक किरणें सीधे पृथ्वी पर आएँगी। इससे
त्वचा कैंसर बढ़ेगा, आँखों को नुकसान होगा ,पौधे और जानवर मर सकते हैं।
कीर्ति – मैडम जी, ओजोन परत की सुरक्षा तो वैश्विक समस्या है। क्या विश्व में इसके लिए कुछ नहीं हो रहा है?
शिक्षिका – सुरक्षा के आवश्यक कदम उठाए तो जा रहे हैं, किन्तु अभी ये पर्याप्त नहीं कहे जा सकते।
प्रोटोकाल 1987 एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है, जिसमें क्लोरोफ्लोरोकार्बन जैसी हानिकारक गैसों के उत्पादन और उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया।संयुक्‍त राष्ट्र पर्यावरण प्रोग्राम ने इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।इन प्रयासों के कारण आज ओजोन परत धीरे-धीरे पुनः ठीक हो रही है।
जाग्रति – मैडम जी, इस समस्या के समाधान के लिए क्या हम बच्चे कुछ सहयोग कर सकते हैं?
शिक्षिका – क्यों नहीं! आप लोग स्वयं जागरूक होकर कुछ उपाय कर सकते हो। साथ ही अपने आसपास परिचितों को सहयोग देने के लिए राजी कर सकते हो। उनको समझा सकते हो कि ओजोन परत की सुरक्षा के लिए हर व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण है, इसलिए हम सभी क्लोरोफ्लैरोकार्बन मुक्त उत्पादों का उपयोग करें, ऊर्जा की बचत करें, पर्यावरण के अनुकूल उपकरण अपनाएँ, हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाएँ तथा जागरूकता फैलाएँ।
स्कूल के बाद विभोर अपने दोस्तों के साथ बैठा।
विभोर – हमें कुछ करना चाहिए!
कीर्ति – लेकिन हम बच्चे क्या कर सकते हैं?
विभोर : बहुत कुछ! हम अपने घर में सबको जागरूक कर सकते हैं।
अगले दिन बच्चों ने एक योजना बनाई।
रवि-हम “ओजोन बचाओ अभियान” शुरू करेंगे!
कीर्ति -हाँ! हम पोस्टर बनाएँगे और लोगों को बताएँगे कि सीएफसी वाले उत्पादों का उपयोग न करें।जाग्रति, सुगंधा, यश, अर्जुन, मनु आदि सभी ने दीवारों पर नारा – लेखन और संदेश लिखने के लिए हामी भरी।
कुछ ही दिनों में पूरे स्कूल में जागरूकता फैल गई। कई अभिभावकों ने अभिभावक मासिक मीटिंग में बच्चों की इस नेक पहल की प्रशंसा भी की।
शिक्षिका (गर्व से): मुझे तुम सब पर गर्व है। तुम छोटे-छोटे कदम उठाकर बड़ा बदलाव ला रहे हो।एक दिन इस मिशन में अवश्य बड़ी सफलता मिलेगी।
विभोर ने आशाभरी दृष्टि से आसमान की ओर देखा और मुस्कुराया।
विभोर (धीरे से): धन्यवाद, ओजोन परत! हम तुम्हारी रक्षा करेंगे।
कहानी का संदेश :पर्यावरण की रक्षा केवल वैज्ञानिकों का काम नहीं, अपितु हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। छोटे-छोटे प्रयास मिलकर बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं।

— गौरीशंकर वैश्य विनम्र

*गौरीशंकर वैश्य विनम्र

117 आदिलनगर, विकासनगर लखनऊ 226022 दूरभाष 09956087585

Leave a Reply