कविता

आत्मा का मर जाना

पार्टी का बदलना मतलब
विचारों का मर जाना होता है
किसी दूजे पार्टी से जुड़ना
उसके विचारधारा को अपनाना
उस पर पक्ष निज रखना,दलील देना
तर्क-वितर्क करना,गलतियों पर
सवाल खड़ा करना,नहीं हो पाता
जब बन जाती है अपनी वजूद
और खूब पैसा आने लगता है
खुशियाँ भाने लगता है
तो जनता की ध्वनि हो जाती नदारत
मीडियाओं में लगने लगते विशारद
जब भय आ जाए नियमन का
सुख न ले पाओं चमन का
ऐसे में दूसरी पार्टी कदम रखना
आत्मा का मर जाना होता है
पहले उसी पार्टी के रहो विरोधक
कर्म,विचारधारा,शैलियों के अवरोधक
फिर वही एकाएक भा जाना
स्वार्थ-लोलुपता को अपनाना
मृत्यु कहलाता है,श्वास रहित मृत्यु
सत्ता धारी पार्टी में चले जाना
फिर सारे दोष, अच्छाई में नजर आना
ये मौन अभिव्यंजना मृत्यु के समाना।।

— चन्द्रकांत खुंटे क्रांति

चन्द्रकांत खुंटे 'क्रांति'

जांजगीर-चाम्पा (छत्तीसगढ़)

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