गीत/नवगीत

एक आवाहन

भारत मइया बुला रही हैं,
फिर हिंदू के लाल को।
मोदी भइया आज बचा लो,
तुम अपने बंगाल को ।

ऊपर गुरु टैगोर सिसकते-
होंगे इस शैतानी पर,
छाती पीट रहे होंगे-
नेताजी बोस नदानी पर ,
आज विवेकानंद बहुत-
विह्वल होंगे मनमानी पर ,
शरतचन्द्र,विद्यापति-
थूकेंगे ममता की बानी पर।

जिसने झोंक दिया अग्नी में,
कला-संस्कृति ताल को।
मोदी भइया आज बचा लो,
तुम अपने बंगाल को ।

अफजल बानी के वोटों-
खातिर हिंदू मरवाती है ,
रेप करें हिंदू बेटी का-
उनको सदा बचाती है ,
सरस्वती-दुर्गा मइया की-
पूजा तक रुकवाती है,
सत्य सनातन के ऊपर-
ये बड़की साढ़ेसाती है ,

रोक नहीं पाएगा कोई
खून पियासी काल को।
मोदी भइया आज बचा लो,
तुम अपने बंगाल को ।

काश्मीर तो बचा लिए अब-
पूछ रहे हैं बंगाली ,
गांव आठ सौ ऐसे हैं-
जो हिंदू से हो गै खाली,
कोई बोले राम-राम तो-
देती है सौ-सौ गाली,
यह दारुण दुख देख-देख-
रोती मां कलकत्ते वाली ,

हिंदू मुक्त कराओगे क्या,
रघुबर के ननिहाल को?
मोदी भइया आज बचा लो,
तुम अपने बंगाल को ।

बंग्लादेशी का आधार बनाने वाला ये शासन ,
रोको अब कटमनी भ्रष्ट-
नागिन का बंद करो राशन,
गुंडे लुच्चे धूर्त मौलवी-
को सिखलाओ अनुशासन ,
पलट गईं दो-चार गाड़ियां,
सभी करेंगे सूर्याशन ,

बांग्लादेश बने, इससे,
पहले काटो हर जाल को ।
मोदी भइया आज बचा लो,
तुम अपने बंगाल को ।

— सुरेश मिश्र

सुरेश मिश्र

हास्य कवि मो. 09869141831, 09619872154

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