कविता

तुम्हारी चाहत

तुम्हारी चाहत को हम कभी मिटने नहीं देंगे,
तुम माँगोगे दर्द, हम खुशी ही देंगे।
तुम्हारी मुस्कान हमें सुकून देती है,
तुम्हारे आँसू हमें हर पल रुला देते हैं।
तुम्हारी हर ख्वाहिश हमें पूरी करनी है,
तुम्हारा हर सपना यकीन में बदलना है।
तुम्हारी राहों में फूल हम बिछाएंगे,
तुम्हारे हर ग़म को खुद में ही समाएंगे।
तेरी हँसी से ही मेरी दुनिया सजती है,
तेरी एक झलक से ये रूह महकती है।
रातों की खामोशी में तेरा नाम पुकारें,
दिन की हर धूप में तेरी छाया उतारें।
तुम हमें भूल जाओ, ये मुमकिन नहीं होगा,
हम तुम्हारी याद को दिल से जाने नहीं देंगे।
हर धड़कन में बस नाम तुम्हारा ही छाया है,
ये दिल हमेशा तुम पर ही आया है।

— गरिमा लखनवी

गरिमा लखनवी

दयानंद कन्या इंटर कालेज महानगर लखनऊ में कंप्यूटर शिक्षक शौक कवितायेँ और लेख लिखना मोबाइल नो. 9889989384