आजकल का युवा
आजकल का युवा
तनावग्रस्त होकर
खीज और कुढ़न में जी रहा है ।
फैशन परस्ती में फंसकर
सिर के बालों में नये-नये आकार दे रहा है
कानों में बाली, हाथों में कड़ा डाले
और मुंह में गुटखा दबाये
भविष्य की परवाह किये बगैर
फोन स्क्रीन पर रील बस रील देख रहा है ।
आजकल के युवा को
न देश की चिंता /
न समाज की चिंता /
न स्वयं के भविष्य की चिंता
बहुत ही भयावह स्थिति में जी रहा है
आज का युवा ।
जीवन निर्माण महत्वपूर्ण है
जाग युवा –
आदर्श दिनचर्या अपना कर
सही समय पर सोना और जागना,
व्यायाम, आसन, प्राणायाम, सैर,
स्वास्थ्यवर्धक भोजन कल्याणकारी है
देश, समाज और स्वयं के लिए ।
— मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
