कविता

जीवन

अपना जीवन आप बनाना।
कभी नहीं बिल्कुल घबराना।।
कर्म सदा ही अच्छे करना।
मर्यादा पथ पर ही चलना।।

मात-पिता की सेवा करना।
कभी नहीं उनसे तुम लड़ना।।
मानव-धर्म पालना करना।
निंदा -नफरत से तुम डरना।।

लालच कभी न मन में लाना।
सदा सत्य पथ बढ़ते जाना।।
दुख में कभी नहीं घबराना।
सुख में आप नहीं इतराना।।

जीवन पथ बाधाएँ आएँ।
इससे नहीं कभी घबराएँ।।
काम सदा मानवता आना।
जिम्मेदारी भूल न जाना।।
जीवन की नव लिखो कहानी।
दुनिया में जाये पहचानी।।
अपनी इक पहचान बनाओ।
मान अरु सम्मान भी पाओ।।

जीवन सबका एक समाना।
फिर क्यों हमको है घिघियाना।।
जीवन मानो तो वरदानी।
मिलता नहीं मुफ्त में पानी।।

सोचो कैसे तुमको जीना।
हार-जीत का रस है पीना।।
जैसा चाहो वैसा जी लो।
सोच समझकर आगे बढ़ लो।

सुधीर श्रीवास्तव

*सुधीर श्रीवास्तव

शिवनगर, इमिलिया गुरूदयाल, बड़गाँव, गोण्डा, उ.प्र.,271002 व्हाट्सएप मो.-8115285921

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