नन्हे कदम, बड़ी उड़ान
नन्हे हाथों में हरियाली,
जैसे धरती का उपहार,
छोटा-सा मन, बड़ी खुशी,
आँखों में सारा संसार।
कदम-कदम पर चलता जाए,
सपनों की है राह,
कभी कद्दू, कभी साइकिल,
हर दिन नई चाह।
नन्हा साथी साथ में,
साइकिल भी मुस्काए,
टोकरी में खुशियाँ भरकर,
आगे-आगे जाए।
धूप खिली है गालों पर,
हँसी खिले जैसे फूल,
मस्ती में ये बचपन प्यारा,
सबसे सुंदर उसूल।
डगमग-डगम चलना सीखे,
गिरकर फिर उठ जाए,
छोटी-सी ये दुनिया उसकी,
खुशियों से भर जाए।
— डॉ. सत्यवान सौरभ
