कविता

एक मां की पुकार

आज ईश्वर कृपा से मुझे
एक सुंदर पुत्र की प्राप्ति हुई है
आज मुझे नारी होने का
मां रूप में
सबसे बड़ा सम्मान मिला है,
लेकिन
मैं सोचती हूं
सर्वप्रथम भ्रूण रूप में
मेरा प्रादुर्भाव हुआ
किस्मत से कन्या रूप में
चाहे अनचाहे मुझे जन्म मिला
पहले बेटी , बहन बनी
फिर सखी सहेली
फिर ननद साली और बुआ
और फिर एक दिन
पूर्ण रूप से समर्पित पत्नी
बहुरानी भाभी,चाची मामी,
कितना सुहावना रहा है
यह रिश्तों का सफर
और आज मैं मां बनी
आज मुझे प्रभु कृपा से,
नारी होने का
सर्वोच्च सम्मान मिला
और एक भ्रूण से मां तक का
मेरा यह सफ़र सफल हुआ।
भ्रूण की रक्षा में ही
ईश्वर की कृपा है
और सृष्टि की रचना का
आधार छिपा है।

— जय प्रकाश भाटिया

जय प्रकाश भाटिया

जय प्रकाश भाटिया जन्म दिन --१४/२/१९४९, टेक्सटाइल इंजीनियर , प्राइवेट कम्पनी में जनरल मेनेजर मो. 9855022670, 9855047845

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