गीत
मेरे अक्षर लेखनी, दिल के सब जज़्बात।
तुमसे मेरे बाद भी, रोज करेंगे बात॥
स्याही में भीगें हुए, मन के सब अहसास,
मेरे हर इक शब्द में, बसते मेरे श्वास।
मौन भले हो जाएँ हम, बदले सब हालात—
तुमसे मेरे बाद भी, रोज करेंगे बात॥
जब अंधेरा रात में, दे मन को आघात,
गीत तभी सहला उठें, बनकर मधुर प्रभात।
सूने मन के आँगना, भर देंगे जज़्बात—
तुमसे मेरे बाद भी, रोज करेंगे बात॥
समय भले ही छीन ले, जीवन की सौगात,
शब्द अमर हो जाएँ तो, रहे हर मुलाकात।
स्याही, कागज़, लेखनी, यादों की दवात—
तुमसे मेरे बाद भी, रोज करेंगे बात॥
— डॉ. सत्यवान सौरभ
